Gaganyaan-2022 के बारेमे संपूर्ण जानकारी हिंदी में

अब भारत बिस्व गुरु बनने जारहा हे Gaganyaan-2022 के साथ। मिशन मंगल और चंद्रयान-२ के सफलता के साथ अब बरी हे भारत के पेहेला मनुस्य युक्त अंतरिख्य मिशन Gaganyaan.

Gaganyaan

भारत आज अंतरिख्य में उन् तमाम बुलंदिओ को बडे आसानी से छूरहा हे। इसके कल्पना भी एक समाय पे किसीने भी नहीं की थी। फिर चाओ मिशन मंगल हो और चंद्रयान-२ हो। इस तरह के मिशन से भारत ने पूरी दुनिआ को अपना ताकत का एसास कराया हे।

Gaganyaan-2022

अंतरिख्य दुनिआ में अपना सफलता से ISRO ने में अपनी लोहा बनाया हे। भारतीय बैज्ञानिको के कड़ी परिश्रम के हेतु भारत ने अंतरिख सारे रहस्य को खोलने पे कामियाबी मिली हे।

Gaganyaan
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साइकेल हुआ आज चंद्रयान और मंगल तक जा पहंचा हे। और इसी बिछ में ISRO के और एक बड़ी कदम “Gaganyaan“. जिसमे मानब को अंतरिख्यो तक ले जाने वाला हे। इस मुकाम को हासिल करने बाद भारत दुनिआ का चौथा देश बन जाएगा। Gaganyaan केलिए अंतरिख यात्रिओ के भी चयन हो चुकी हे।

Gaganyaan भारत का पहला युक्त अंतरिख्य मिशन हे। इसके लिए ISRO के टीम दिन रात जुटी हे। इसके लिए अंतरिख्य में जानेवाले ४ भारतीय यात्रिओ चयन भी पूरी हो चुकी हे।

ISRO प्रमुख K. Sivan ने ०१ जानुअरी २०२०, नब बर्स उपलखये एक प्रेस कॉनफेरेन्स करके Gaganyaan और चंद्रयान-3 के बारेमे सूचना दी। इसके साथ साथ वो गगन यान में अंतरिख्य वाले ४ भारतीयों एयर फाॅर्स अफसरों दी और ये बताया की ४ यात्रिओ की मेडिकल टेस्ट हो चुकी हे।

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Gaganyaan यात्रिओ की ट्रेनिंग

जानुअरी महीने तीसरे हप्ते से इन् ४ अंतरिख यात्रिओ (Vyomanauts) के ट्रेनिंग रुस के अंतरिख एजेंसी ROS-COS-MOS में होगी। भारत अभी फिलाल केलिए अंतरिख यात्रिओ केलिए ट्रेनिंग की सुबिधा नहीं हे। इससे बनाने केलिए बहुत समाया लगेगा।अंतरिख्य यात्रिओ केलिए स्पेस सूट रुस से ख़रीदा जाएगी।

Vyomanauts: The person who travel Space from India is called vyomanauts. Vyomanauts is used for the word Astronauts. Astronauts word is used by USA for their space travelers while cosmonaut is used for Russia’s Space travelers.

Gaganyaan केलिए Budget

Gaganyaan

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने २०१८ गणततंत्र दिवस अबसर पर लालकिला से गगन यान की घोसना की थी। गगन यान मिशन केलिए केंद्रीए कैबिनेट ने ₹10000 करोड़ का बजट मंजूरी दी थी। भारत के स्पेस इतिहास में ये सबसे बड़ी बजट युक्त स्पेस मिशन हे। इस ₹ 10000 करोड़ रुपये के सहायता से ISRO फाइनल मानब मिशन पहले दो बार पुतले अंतरिख्य भेजे जाएगी और २ परिख्या किआ जाएगा। और अंत में मानब को जाएगा। पहेला ट्रायल डिसेम्बर 2020 को और दूसरा ट्रायल जुलाई 2021 को होगा। भारत यान केलिए रूस और फ्रांस समझौता किआ हुआ हे।

गगनयान भेजने पे भारत का फायदा

मिशन गगनयान की सफलता देश और ईसरो की अंतरिख्य प्रोजेक्ट केलिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। और इस के साथ साथ देश के युबाओ केलिए अंतरिख बिज्ञानो पे इंट्रेस्ट बढ़ेगी। फिलाल इसका असर तटखयानत नहीं मिलेगा मगर टर्म में इसका बड़ी फायदा देश को मिलेगा। भारत पूरी बिस्व में एक महा सकती के रूप में उभरने की रास्ता खुल जाएगी। भारत का स्पेस स्टेशन बनाने में और एक कदम बढ़ जाएगी।

गगनयान का खासियत

  • भारत का पेहला मनबयुक्त स्पेस मिशन हे।
  • ३.७ टन्न के कैप्सूल में ३ लोगो को ले जा सकती हे।
  • 7 दिन केलिए, ४०० किमी की उचाई पे ये करेगा।
  • इस मिशन के निगरानी ISRO के बंगलुरु स्तिथ सेण्टर में किआ जाएगा।
  • इस मिशन का कमान एक महिला बैगनिक के पास हे।

क्या क्या असुबिधा हे ?

अंतरीखो में मनुस्य को भेजना काफी जोखिम भरा होती हे होती हे। इसमें नाकि भरी पेसो की जरुरत होती हे बलकि इंसानो जान को भी खतरा रहता हे। एक मनुस्य को अंतरिख में जाने केलिए शारीरिक और मानसिक दसखयता ही नहीं बलकि प्रकृति के बिरुद्ध काम करने होती हे। इसके लिए खास परसिखन होती हे। इन् सबकुछ के बाद भी अनेक असुबिधा का सामना करना पड़ता हे। जथा :

  • गुर्तवआकर्सण बल की कमी
  • रकेट के साथ 29000 Km /Hr स्पीड से ट्रेवल करना
  • रकेट का दुर्घटना होना
  • खाद्य पेय में परिबर्तन होना
  • महाकाश के रेडिएशन के खतरा
  • पृथिबी को वापस आने पे खतरा
  • पृथिबी पर लैंडिंग के खतरा

यह Gaganyaan के बारेमे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य था। अगर ये पोस्ट अच्छा लगा तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे। अगर गगन यान से जुडी कुछ भी सुझाव हे तो आप नीचे कमेंट में बताये।

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